जब अज़हरुद्दीन ने उस भीड़ से बदला लिया जिसने उसे कुछ महीने पहले गालियां दी थीं

साल 1996. (एकदम लगान के अमिताभ बच्चन वाले वॉइस ओवर के स्टाइल में) ईडेन गार्डन्स का मैदान. 27 नवंबर को एक टेस्ट मैच शुरू हुआ. इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच. ये वो दौर था जब इंडिया की कप्तानी सचिन तेंदुलकर के हाथ में थी. हैन्सी क्रोंजे साउथ अफ्रीका को लीड कर रहे थे. गैरी कर्स्टन, जिन्होंने इंडिया की वर्ल्ड कप विनिंग टीम को कोच किया था, उस वक़्त साउथ अफ़्रीकी टीम का हिस्सा थे.

साउथ अफ्रीका ने टॉस जीत के पहले बैटिंग की. गैरी कर्स्टन और एंड्रू हडसन ओपेनिंग करने उतरे और खूंटा गाड़ दिया. श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद सुनील जोशी गांगुली, हीरवानी कुम्बले सभी ने सारी कोशिश कर ली लेकिन इन दोनों का कुछ नहीं कर पाए. पहले विकेट के लिए 236 रन की पार्टनरशिप हुई. गैरी कर्स्टन 102 रन बनाकर आउट हुए. बाद में छोटे-छोटे हिस्सेदारों के साथ साउथ अफ्रीका ने कुल 428 रन बनाए.

जवाब में इंडिया की टीम बैटिंग करने उतरी और रेगुलर इंटरवल पर विकेट गिरते रहे. पार्टनरशिप बनना शुरू हुई आठवें विकेट के लिए जब अज़हर और कुम्बले ने साउथ अफ्रीका को रोकने की कोशिश की. अज़हर ने 109 और कुम्बले ने 88 रन बनाए. दोनों के बीच 161 रन की पार्टनरशिप हुई.

इस दौरान अज़हर ने कमाल की बैटिंग की. खड़े कॉलर के साथ अज़हर बैटिंग करने उतरे. सफ़ेद हेलमेट, शर्ट के पहले दो खुले बटन, हल्के झुके कंधे, एक तरफ़ झुका सर और बेहद बेतरतीबी से पकड़ा बल्ला. अज़हर मैदान पर आ चुका था. ईडेन गार्डन्स अज़हर के लिए हमेशा अच्छी खबरें लाया. इस मैदान पर इससे पहले अज़हर ने 110, 141, 60, 182 रन बनाए थे. इस दौरान अज़हर ने अपनी पहचान बनाई, कप्तानी शुरू की, कप्तानी से हटाए गए और इंडिया को वापस टेस्ट मैचों में एक दबदबा बनाने वाली टीम बनाया. लेकिन इन सब के बाद 1996 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल भी आया. अज़हर ने टॉस जीता और फील्डिंग की. उसके बाद जो हुआ, इतिहास में दर्ज है. लेकिन अज़हर एक बार फिर उसी मैदान पर खड़ा था. वर्ल्ड कप के बाद इंडिया ने इंग्लैंड का दौरा किया और सीरीज़ गंवाई. 5 इनिंग्स में अज़हर के मात्र 42 रन. इंडिया में बैटिंग के लिए नए नाम आते जा रहे थे लेकिन अज़हर का फ़ेल होना खटक रहा था. यहीं अज़हर की कप्तानी गई.

अज़हर जब ईडेन गार्डन्स में बैटिंग करने के लिए कदम बढ़ा रहा था, उसके खाते में पिछले 5 टेस्ट मैचों में 139 रन लिखे हुए थे. अज़हर को साउथ अफ्रीका से ही नहीं बल्कि खुद से भी लड़ना था. 28 नवंबर को अज़हर बैटिंग करने उतरा. 6 रन के स्कोर पर ब्रायन मैकमिलन की एक बाउंसर और अज़हरुद्दीन रिटायर्ड हर्ट. गेंद जाकर उनकी कुहनी में लगी थी. 87 रन पर इंडिया ने तीन विकेट और एक खिलाड़ी खो दिया था. साउथ अफ्रीका ने इंडिया की बैटिंग लाइन-अप को तहस-नहस करना शुरू कर दिया. इंडिया ने 152 रन पर दिन खतम किया. 6 विकेट जा चुके थे. अगली सुबह डोनाल्ड ने श्रीनाथ के विकेटों का भर्ता बना दिया. 161 पर 7.

अज़हर दोबारा बैटिंग करने उतरा तो ईडेन गार्डन्स में शोर उठा. ये आशावादी भीड़ थी. चोट खाए खिलाड़ी को वापस आता देख वो चिंघाड़ उठी. कॉलर अब भी खड़ा था, गले से लटकी ताबीज़ बाहर झांक रही थी. ईडेन में भीड़ जुटने लगी थी.

साउथ अफ्रीका ने सारी तैयारी कर रखी थी. वो अज़हर को बाउंसर से परेशान करने के मूड में थे. पिछले दिन भी अज़हर को बाउंसर ने ही वापस भेजा था. एलेन डोनाल्ड अज़हर की ओर दौड़ रहा था. वो इतनी तेज़ी से कभी नहीं दौड़ा था. उसे पॉपिंग क्रीज़ और अज़हर का हेलमेट ही दिखाई दे रहा था. छोटी पटकी गई गेंद अज़हर के मुंह के सामने थी और फिर ईडेन गार्डन्स ने जो देखा, बदली हुई कहानी बता रहा था. एक ज़ोरदार चटाक की आवाज़ हुई और गेंद बाउंड्री पर दिखी. गेंद मिड-ऑन और मिड-विकेट के बीच से चार रन के लिए जा चुकी थी. इस दौरान अज़हर ने गेंद को नीचे रखने का भी ख्याल नहीं किया. बेतरतीबी से पकड़े गए बल्ले में थॉर के हथौड़े जितनी ताकत आ चुकी थी. कोहनी की चोट का दर्द अब कुछ कम हुआ था. जिन्हें अज़हर की कलाइयों का जादू याद था, अब अज़हर की निर्ममता देख रहे थे.

डोनाल्ड अब छोटी गेंद फेंक रहे थे तो हुक मारा जा रहा था. वो लम्बी फेंक रहे थे तो अज़हर बल्ले का चेहरा सामने कर रहे थे. इस वक़्त अज़हर अपनी पूरी लय में थे. साथ ही उनका साथ दे रहे थे अनिल कुम्बले. अनिल कुम्बले सिर्फ साथ ही नहीं दे रहे थे बल्कि साथ निभा रहे थे. ईडेन गार्डन्स की भीड़ तालियां पीटते नहीं थक रही थी.

क्लूज़नर का ओवर

लांस क्लूज़नर को अटैक पर लाया गया. इंडिया का स्कोर – 200 रन पर 7 विकेट. अज़हर के ऊपर छोटी गेंदों का कोई असर होता नहीं दिख रहा था. लेकिन फिर भी, साउथ अफ्रीका के पास और कोई ऑप्शन नहीं था. लिहाज़ा वो बस अज़हर को हुक मारने में गलती करने का इंतज़ार कर रहे थे.

# पहला शॉट. क्लूज़नर दौड़ते हुए आया और गेंद पटक दी. क्लूज़नर एंगल बनाकर सीधे अज़हर के हेलमेट को ही निशाना बना रहे थे. गेंद को क्रीज़ के किनारे से फेंक रहे थे. अज़हर बिजली की तेज़ी से पिछले पैरों पर गए और फिर एक ज़ोरदार तमाचे की आवाज़ से कलकत्ता के मैदान की नींव हिल गई. गेंद फिर से बाउंड्री पार दिखी. चार रन.

# दूसरा शॉट. क्लूज़नर अपना पहला मैच खेल रहा था. लिहाज़ा अभी अनुभव की कमी थी. वो फिर दौड़ा. इस बार क्रीज़ पर कोई एंगल बनाने की कोशिश नहीं की गई. गेंद अज़हर की देह के ठीक सामने पटकी गई थी. ये और भी आसान शॉट था. अज़हर फिर से पिछले पैर पर खड़े थे और फिर वही आवाज़. तड़ाक! इस बार गेंद हवा में ज़्यादा देर तक थी. जाकर प्रैक्टिस पिचों के पास गिरी और बाउंड्री पार. चार रन. खुले कंधों के साथ बेहद क्रूरता से मारा गया शॉट.

# तीसरा शॉट. चूंकि क्लूज़नर अपना पहला मैच खेल रहा था, अनुभव की कमी तो थी ही. उसे मालूम होना चाहिए था कि गेंद को ऐसे मौके पर अगर आगे फेंकना भी है तो कम से कम अज़हर के पैरों पर तो न ही फेंका जाए. लेकिन अगली गेंद अज़हर के पैरों के पास जा गिरी. लगभग यॉर्कर लेंथ की गेंद. अज़हर फिर से बैकफुट पर. पहला पैर हटाकर अपने बाएं खिसका दिया. ये गेंद के लिए रास्ता क्लियर करने की बेहद ज़रूरी प्रक्रिया होती है जो आगे चलकर टी-20 मैचों में खूब देखी गई. अज़हर की भयानक बैट स्पीड और सटीक टाइमिंग के दम पर गेंद एक बार फिर मिड-विकेट बाउंड्री पर जा रही थी. कमेंट्री पर हर्षा भोगले थे. गेंद के टप्पा खाते ही उन्हें लगा की अज़हर बोल्ड हो गए हैं. अगले ही पल वो कहते हैं, “नहीं, इसने तो चौका मार दिया है.” दरअसल क्रिकेट देखने वाली जमात को अब तक यॉर्कर गेंदों को बैकफुट पर जाकर मारने वाले कारीगरों को देखने की आदत नहीं पड़ी थी. उन्हें नहीं मालूम था कि ऐसी गेंदों को मिडल स्टम्प की लाइन से कलाई के सहारे 45 डिग्री के कोण पर मोड़ा जा सकता था.

ईडेन गार्डन्स की जनता अब पागल हो चुकी थी. लांस क्लूज़नर बीच पिच में खड़ा ये समझने की कोशिश कर रहा था कि उसके सामने जो हो रहा था, आखिर हो क्या रहा था?

# चौथा शॉट. समूचा देश जानता था कि आगे क्या करना है, क्लूज़नर को इस बारे में अब कुछ भी नहीं मालूम था. जिसे मालूम था कि आगे क्या होने वाला है, बैटिंग कर रहा था. अगली गेंद आधे रास्ते में ही थी कि अज़हर ने अपना पिछला पैर बाहर निकाल लिया. शरीर का भार हल्का सा पीछे की ओर डाला और फिर से गेंद को पीटने के लिए बल्ला घुमा दिया. एक और बाउंड्री. अम्पायर ने नो बॉल का इशारा किया. क्लूज़नर की बोहनी ठीक नहीं हो रही थी. अज़हर हर शॉट के बाद ग्लव्स निकालकर कुम्बले से बात करने पहुंच जाते थे. मुझे लगता नहीं कि ईडेन की भीड़ के शोर में उन्हें एक दूसरे की बातें सुनाई देती होंगी. हर्षा भोगले कह रहे थे, “सच कहूं तो ये अविश्वसनीय बैटिंग है.” और वो झूठ नहीं बोल रहे थे.

# पांचवां शॉट. हॉगवर्ट्स के आसमान में जब दमपिशाच मंडराते थे तो आसमान उनकी काली परछाइयों से बाहर जाता था. हर ओर नीरसता और निराशा का माहौल हो जाता था. दमपिशाच इस धरती पर पाए जाने वाले सबसे भयावह जीव होते हैं. वो इंसानों की शान्ति, उनकी खुशियां, उनकी हर अच्छाइयों को खींच लेते थे. लांस क्लूज़नर के लिए अज़हरुद्दीन उसी दमपिशाच का काम कर रहे थे. अब क्लूज़नर के जीवन का ध्येय उस ओवर को कैसे भी ख़त्म करना था. वो दौड़ता हुआ आया और गेंद को अज़हर के सामने परोस दिया. अज़हर फ्रंट फुट पर आया, बल्ले के फ़ेस को गेंद से मिलाया और फिर से हवा में बल्ला लहरा दिया. एक ऑन-ड्राइव जिसमें बाज़ुओं की लगभग पूरी ताकत झोंक दी गई थी. मिड विकेट बाउंड्री पर पांचवां चौका.

इस ओवर से पहले फॉलोऑन बचाने के लिए जो 29 रन चाहिए थे, उसमें से 21 रन आ चुके थे. ईडेन गार्डन्स में शोर अपने चरम पर था.

अगले ओवर की पहली दो गेंदों पर डोनाल्ड को कुम्बले ने दो चौके मारे. और आगे की इनिंग्स ऐसे ही चलती रही. अज़हर ने अपना पचासा मात्र 35 गेंदों में पूरा किया. बाकी इनिंग्स भी उसने इसी रौ में मैकमिलन, पॉल एडम्स, सिमकॉक्स ऐसे ही पीटे जा रहे थे. पॉल एडम्स को अज़हर क्रीज़ से बाहर निकलकर मार रहे थे. लेकिन सबसे गहरी मार क्लूज़नर को ही लगी.

पॉल एडम्स की गेंद को बैकफ़ुट पर चौका मारकर अज़हर ने सेंचुरी पूरी की. 74 गेंदों में अज़हर की सेंचुरी पड़ी. कपिल देव के साथ इंडिया के लिए सबसे तेज़ टेस्ट सेंचुरी. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में चौथी सबसे तेज़ सेंचुरी. कलकत्ता की जनता शोर मचा रही थी. तालियां पीट रही थी. मैदान में शायद ही कोई ऐसा था जो बैठा था. लोग तब तक ताली बजा रहे थे जब तक उनके हाथ में जान थी. पिछली शाम जिसने चोट खाई, मैदान से वापस चला गया, आज सामने वाली टीम को उतनी ही चोट दे रहा था.


ईडेन गार्डन्स में जुटी भीड़ अज़हर पर सब कुछ न्योछावर करने को तैयार थी. लेकिन अज़हर ने नज़र उठाकर भी उनकी ओर नहीं देखा. न हेलमेट उतारा, न बल्ला दिखाया. वो बस कुम्बले से बात कर रहा था. कुछ ही महीने पहले श्रीलंका के खिलाफ़ सेमीफाइनल के दौरान इसी भीड़ ने स्टेडियम में आग लगा दी थी. इसी भीड़ ने काम्बली को रुलाया था. इसी भीड़ ने इंडिया के कप्तान अज़हरुद्दीन को मां-बहन की गालियों से नवाज़ा था. आज वही अज़हर उन्हें उनकी जगह दिखाता हुआ मालूम दे रहा था. कई ऐसे मौके आए जब खिलाड़ियों पर अपने लिए खेलने के आरोप लगे. अज़हर उस दिन अपने लिए ही खेल रहा था और लोग उसकी पीठ थपथपा रहे थे.

अज़हर जब आया था तो स्कोर था 161 रन का. जब वो पॉल एडम्स की एक फ़ुल लेंथ की गेंद को ड्राइव करने के चक्कर में आउट हुआ तो स्कोर ठीक डबल हो गया था.

कुम्बले सेंचुरी से चूके. जो उन्होंने ओवल में 2007 में बनाई. इंडिया पहली इनिंग्स में 329 रन पर आउट हुई. साउथ अफ़्रीका ने फिर से बैटिंग में इंडिया को छकाया. गैरी ने दूसरी इनिंग्स में भी सेंचुरी मारी. डेरिल कलिनन ने 150 का आंकड़ा पार किया.

इंडिया को जीतने के लिए 467 रन का टार्गेट मिला जिसका पीछा करने के मूड में कोई भी नहीं दिखा. मैच ड्रॉ करवाने के लिए खेलने उतरी टीम 137 रन पर निपट गई. इंडिया 329 रन से मैच हार गया.

अजहरुद्दीन का कॉलर खड़ा था. ईडेन गार्डन्स से अज़हर ने बदला पूरा कर लिया था.

0 Comments

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

CONTACT US

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Sending

©2019 My Patidar a Proparty of Aadya Enterprise

Privacy Policy  Terms of Service  About Us

Log in with your credentials

or    

Forgot your details?

Create Account