शिवंश खेती यह खाद बंजर मिटटी में जान दाल देती हे

बदलाव के बिज

यह खाद बंजर मिटटी में पहले इस्तमाल सेही वापस जान दाल देती हे, जिससे किसानोका खर्चा घटता है, उनकी पैदावार बेहतर होती हे, ओर आमदनी बढाती है

यह क्यों महत्वपूर्ण है

दुनिया भर के 2 अरब किसान यूरिया नाम की नाइट्रोजन खाद अपनी फसलों में डालते हैं, जिसका उत्पादन शुरुआत में औद्योगिक खेती के लिए होता था। यूरिया को छोटे किसानों के सामने आसानी से उत्पादन बढ़ाने के तरीके के रूप में पेश किया गया था, और काफी किसानों ने इस पर भरोसा कर अपनी सदियों पुरानी खेती की परंपराओं को छोड़ दिया। दुर्भाग्यवश, जब यूरिया मिट्टी में जाता है, तो उससे मिट्टी के सूक्ष्मजीवों का संतुलन बिगड़ जाता है। ये सूक्ष्मजीव बढ़ते पौधों को विटामिन और खनिज प्रदान करने के लिए आवश्यक है। इस प्रकार से मिट्टी के जीवन-तंत्र को नष्ट कर देने से एक के बाद एक समस्याएं आने लगती हैं:

  • फसलों में बीमारी ज्यादा होती हैं क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है। कोई भी कमज़ोर पौधा और फ़सल बीमारी के कीड़ों को आकर्षित करता है। बीमारियों की वजह से किसानों को कीटनाशकों और हर्बीसाइड्स पर पैसा खर्च करना पड़ता है।
  • मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी से फसलों का उत्पादन गिर जाता है, जिसकी वजह से किसान और भी ज़्यादा खाद डालने लगते हैं।
  • बीमार और कुपोषित फसल से बीज खराब बनते हैं, जो अगली फसल के लिए इस्तेमाल नहीं किये जा सकते। इसलिए किसानों को बीज खरीदने पड़ते हैं, जो कि कई बार जी.एम्.ओ. होते  हैं।
  • फसलें कम पौष्टिक होती हैं क्योंकि पौधों को मिट्टी से पोषक तत्व नहीं मिलते। इससे हमारी कुपोषण की समस्या भी बढ़ जाती है, ख़ास कर के बच्चों में।
  • खेतों को ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है क्योंकि मिट्टी के सूक्ष्मजीवों के नष्ट होने से मिट्टी की जल-धारण क्षमता काफी कम हो जाती है। इसलिए किसान ज़्यादा सिंचाई करते हैं, जिससे जमीन के नीचे पानी का स्तर गिर जाता है, पानी बहकर बर्बाद होता है और सतह पर पानी प्रदूषित भी हो जाता है।

काफी किसान जो अब तक यूरिया पर निर्भर रहे हैं, उनको और भी बड़ी मात्रा में रासायनिक खाद, कीटनाशकों और  जी.एम्.ओ बीज का इस्तेमाल करना पड़ता हैं, जो उनकी मिट्टी को नुकसान पहुंचाते हैं, उनके पानी को जहरीला बनाते हैं, उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसकी वजह से उनकी आमदनी कम हो जाती है। इन बढ़ती लागतों के चलते, किसान मुश्किल से 2% लाभ ही कमा रहे हैं, जो उनकी गरीबी और भोजन की समस्या को और भी बढ़ाता है।

शिवंश खेती

अरबों ग्रामीण किसान अपने परिवारों के लिए पर्याप्त पैसे कमाने और उनका पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं। हम उन्हें मुफ़्त में खाद बनाना सिखा कर उनकी आमदनी वापस बढ़ाने में उनकी मदद कर रहे हैं।

समाधान

शिवंश खाद

शिवंश खाद एक मुफ्त मे बनने वाली खाद है जो बंजर ज़मीन को लहलहाते खेत में बदल देती है, जिससे किसानों की रसायनों पर निर्भरता कम हो जाती है और उनका मुनाफा बढ़ जाता है। शिवंश खाद जो कुछ भी खेतों में बची हुई सामग्री होती है—सूखे पत्ते, ताजा घास, फसल के अवशेष, गोबर–– उन्हें इकठ्ठा कर के एक ढेर में डाल कर बनाया जाता है। हर दूसरे दिन ढेर को पलटने के अलावा सारे काम प्रकृति खुद कर देती है। 18 दिनों के बाद हमें मिलती है सूक्ष्मजीवों से भरी हुई एक पोषक खाद। शिवंश खाद का खेतों में इस्तेमाल पहले सीज़न में ही बंजर मिट्टी को फिर से जीवित कर देता है। शिवंश खाद दुनिया भर के किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।

खाद बनाने के निर्देश

वीडियो देखें

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शिवंश खाद क्यों काम करता है

बुनियादी बातों पर वापस जाना

शिवंश खाद इसलिए काम करती है क्योंकि यह खेती की सबसे बुनियादी चीज़ सुधार देती है जो कि है मिट्टी। स्वस्थ मिट्टी से स्वस्थ फसल होती है।

स्वस्थ पौधे मज़बूत होते है और उनकी इम्युनिटी अच्छी होती है और उन पर कीटाणु और बीमारियों का ज़्यादा प्रभाव नहीं होता। इसलिए उन्हें कीटनाशकों और हर्बीसाइड्स की ज़रूरत कम होती है। स्वस्थ पौधे ज्यादा मात्रा में अच्छी क्वालिटी की फसलें पैदा करते हैं, जिससे किसानों को ज़्यादा आमदनी और ज़्यादा पोषक भोजन मिलता है। स्वस्थ पौधों से अच्छे बीज भी मिलता है, जिससे किसानों को महंगा बीज खरीदने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

प्रभाव

खेतों की कहानी

2016 में शिवंश खाद की फील्ड टेस्टिंग भारत में 50 खेतों के साथ शुरू हुई। एक साल के अन्दर यह लगभग 40,000 खेतों में फैल गया। परिणाम आश्चर्यजनक रहे है। शिवांश खाद को यूरिया की जगह इस्तेमाल करने वाले किसानों के अनुसार उन्हें बेहतर पैदावार और बेहतर फसल मिली है। वे कम कीटनाशक का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि उनके पौधे स्वस्थ हैं। उनकी फसल बेहतर दिख रही है और खाने का स्वाद भी बढ़िया है। उनके बच्चे ज़्यादा स्व्स्थ हैं क्योंकि वे अधिक पौष्टिक भोजन खा रहे हैं। उनकी सिंचाई आवश्यकताएं कम हो गयी हैं क्योंकि जो 90% पानी पहले भाप बन कर उड़ जाता था, वह 90% अब मिट्टी में रहता है। फसलों से बढ़िया बीज मिल रहे हैं, जिसे अगले सीजन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसानों को अब बीज खरीदने की ज़रूरत नहीं है। फसल काटने के बाद जो बचता है उसे जलाने के बजाय, वे इसे खाद में बदल रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण कम हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान की आमदनी बढ़िया हो रही है, जिससे वे अपने बच्चों को स्कूल भेज पा रहे हैं, बुनियादी जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, और बेहतर ज़िंदग़ी जी रहे हैं। इन सब चीज़ों का श्रेय दिया जा सकता है शिवंश खाद से मिट्टी को पुनर्जीवित करने को।

और जानना चाहते हैं?

यहां आप सीख सकते हैं कि शिवंश प्रक्रिया का इस्तेमाल कर के आप खुद खाद कैसे बना सकते हैं।

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