अयोध्या विवाद: फैसले से पहले मुस्लिमों से मिले केंद्रीय मंत्री, सद्भाव बनाए रखने पर जोर

वहीं अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री फैलान वालों के खिलाफ फैजाबाद पुलिस ने 16,000 स्वयंसेवकों को तैनात किया है.

अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले आज केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के आवास पर बैठक आयोजित की गई. फ़ैसले से पहले मुस्लिमों तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और बीजेपी की कोशिशों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव और एकता बनाए रखने पर जोर देने के लिए यह बैठक आयोजित की गई.

केंद्रीय मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के घर पर आयोजित इस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता कृष्ण गोपाल, रामलाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन शामिल हुए.

इसके अलावा जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी, फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमल फारुकी, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी और शिया धर्मगुरु कल्बे जवाद बैठक में मौजूद प्रमुख मुस्लिम हस्तियों में से थे.

बैठक में उपस्थित लोगों ने किसी भी परिस्थिति में देश के सामाजिक-सांप्रदायिक सद्भाव, भाईचारे और एकता के ताने-बाने को मजबूत और संरक्षित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने अपने निहित स्वार्थों के लिए समाज की एकता और सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की साजिश में लगे तत्वों से सावधान रहने की अपील की.

मुख्तार अब्बास नकवी ने बैठक में कहा कि विविधता में एकता हमारी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता है. यह समाज के सभी वर्गों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि एकता की इस ताकत की रक्षा करें.

वहीं फैजाबाद पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों के नकेल कसने की तैयारी कर ली है. एक अधिकारी ने कहा कि अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री फैलान वालों के खिलाफ फैजाबाद पुलिस ने 16,000 स्वयंसेवकों को तैनात किया है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर आदेश जारी होने के बाद शांती बनाए रखने के लिए जिले के 1600 इलाकों में स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है.

इससे पहले बीजेपी ने अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं से भावनात्मक और भड़काऊ बयान देने से बचने को कहा है. बीजेपी नेताओं को पीएम मोदी और अमित शाह के बयानों के अनुरूप ही प्रतिक्रिया देने की नसीहत दी गई है.

वहीं कुछ दिन पहले राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने भी अपने प्रचारकों को इसी तरह का परामर्श जारी किया था. संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हाल ही में प्रचारकों की बैठक में कहा था कि राम मंदिर फैसला पक्ष में आने पर विजय उत्सव नहीं मनाया जाए या जुलूस नहीं निकाले जाएं.
 

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